Uttarakhand: दुष्कर्म के दो आरोपियों को हाई कोर्ट से बड़ी राहत, HC ने दिए रिहाई के आदेश; ये है पूरा मामला

Edited By Vandana Khosla, Updated: 16 Feb, 2026 05:31 PM

uttarakhand two rape accused get major relief from the high court

नैनीतालः उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने 12 फरवरी को सुनाए अपने फैसले में हालांकि, अपहरण के मामले में एक...

नैनीतालः उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सामूहिक दुष्कर्म के एक मामले में दो आरोपियों की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति रविंद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने 12 फरवरी को सुनाए अपने फैसले में हालांकि, अपहरण के मामले में एक आरोपी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। आरोपियों ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 2018 में हुई घटना के संबंध में निचली अदालत के 2019 के निर्णय को चुनौती देते हुए अपीलें दायर की थीं।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मानसिक रूप से कमजोर एक महिला लापता हो गई थी और बाद में वह डरी हुई दशा में मिली थी। जांच के दौरान मामले में चिकित्सकीय और फॉरेंसिक परीक्षण हुए। सीसीटीवी फुटेज और डीएनए रिपोर्ट समेत चिकित्सकीय, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों का परीक्षण करने पर उच्च न्यायालय ने पाया कि चिकित्सकीय राय में निर्णायक रूप से दुष्कर्म साबित नहीं हुआ और फॉरेंसिक जांच में चूक हुई। इसलिए यौन उत्पीड़न के आरोपों को साबित नहीं किया जा सकता।

अदालत ने पाया कि फॉरेंसिक सामग्री दोनों आरोपियों को कथित यौन उत्पीड़न से नहीं जोड़ती, फिर भी सीसीटीवी फुटेज और आस-पास की परिस्थितियों से यह साबित होता है कि सह-आरोपी पीड़िता को कानूनी संरक्षकता से दूर ले गया था। इसलिए दोनों आरोपियों की दुष्कर्म से संबंधित दोषसिद्धि को रद्द करते हुए, अदालत ने उनमें से एक आरोपी की अपहरण की दोषसिद्धि को बरकरार रखा।

इस मामले में आरोपी पहले ही चार साल से अधिक की कैद काट चुका है, जो इस मामले में दी गई सजा के बराबर है, अदालत ने दोनों की रिहाई के आदेश दिए। उच्च न्यायालय ने संदेह के आधार की बजाय कानूनी तौर पर सिद्ध सबूतों के आधार पर आपराधिक दोषसिद्धि किए जाने पर बल देते हुए निर्णय में कहा कि यद्यपि अदालतों को 'कमजोर पीड़ितों' से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता दिखानी चाहिए, फिर भी संदेह से परे सबूत का मानक आवश्यक है।

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