सिंचाई सचिव को अवमानना संबंधी नोटिस जारी, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने 4 सप्ताह में मांगा जवाब

Edited By Ramanjot, Updated: 31 Jul, 2026 05:42 PM

uttarakhand high court contempt notice issued to irrigation secretary

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने सिंचाई विभाग, हरिद्वार से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन विभाग की ओर से उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।

नैनीताल: उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सिंचाई सचिव को प्रथम द्दष्टया अवमानना का दोषी पाते हुए उन्हें चार सप्ताह में जवाब देने को कहा और पूछा कि न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन क्यों नहीं किया गया। हरिद्वार निवासी जगपाल सिंह की ओर से दायर अवमानना याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ में सुनवाई हुई। 

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि उन्होंने सिंचाई विभाग, हरिद्वार से सूचना का अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी लेकिन विभाग की ओर से उन्हें सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। इसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में अपील दायर की। याचिकाकर्ता के अनुसार राज्य सूचना आयोग की ओर से मामले की जांच के लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिए गए थे लेकिन न तो जांच कराई गई और न ही कोई आदेश पारित किया गया। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया गया। 

उच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए सिंचाई सचिव को याचिकाकर्ता की शिकायत पर चार सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्होंने सचिव सिंचाई विभाग सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की। पिछली सुनवाई पर राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि राज्य सूचना आयोग जांच कराने का निर्देश सरकारी अधिकारियों को नहीं दे सकता, इसलिए याचिका निरस्त की जानी चाहिए। 

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