कैची धाम में भारी गड़बड़ियां ! हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, सरकार को नोटिस जारी

Edited By Vandana Khosla, Updated: 19 Feb, 2026 05:33 PM

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नैनीतालः उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैची धाम में कथित रूप से व्याप्त गड़बड़ियों और वित्तीय संचालन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अगुवाई वाली खंडपीठ ने इस मामले में बुधवार को सुनवाई करते...

नैनीतालः उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक केंद्र कैची धाम में कथित रूप से व्याप्त गड़बड़ियों और वित्तीय संचालन को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अगुवाई वाली खंडपीठ ने इस मामले में बुधवार को सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। पिथौरागढ़ जिले के बसीखेत निवासी ठाकुर सिंह डसीला की ओर से उच्च न्यायालय को भेजे गए पत्र का संज्ञान लेते हुए उच्च न्यायालय ने इस मामले में जनहित याचिका दायर की है।

पत्र में कहा गया है कि बाबा नीम करौली द्वारा स्थापित इस प्रसिद्ध धाम का संचालन करने वाले ट्रस्ट के बारे में मूलभूत जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मंदिर ट्रस्ट का नाम, पंजीकरण विवरण, कार्यालय का पता, ट्रस्टियों की संख्या और नियुक्ति संबंधी जानकारी स्थानीय प्रशासन और रजिस्ट्रार कार्यालय में उपलब्ध नहीं है। आगे कहा गया है कि मंदिर में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है किंतु आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी नहीं किया जाता। विदेशी श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए विदेशी अंशदान (एफसीआरए) पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। नकद दान के लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

अन्य प्रमुख मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा बदरीनाथ-केदारनाथ धाम का संचालन अधिनियम के तहत किया जाता है जबकि जागेश्वर मंदिर का प्रबंधन जिला प्रशासन की निगरानी में समिति के माध्यम से होता है। देश के बड़े मंदिरों में भी सरकारी निगरानी या एक वैधानिक व्यवस्था लागू है।

यह भी कहा गया है कि धार्मिक ट्रस्टों का पंजीकरण भारतीय ट्रस्ट अधिनियम, 1882 के तहत होता है, इसलिए ट्रस्ट डीड, पंजीकरण प्रमाणपत्र, ट्रस्टियों का विवरण, संपत्ति और वार्षिक ऑडिट रिपोटर् सार्वजनिक की जानी चाहिए। स्थानीय ग्रामवासियों और सम्मानित नागरिकों को भी ट्रस्ट प्रबंधन में शामिल किया जाने की मांग की गयी है। पत्र में अन्य गड़बड़ियों की ओर से इशारा किया गया है।

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