Edited By Vandana Khosla, Updated: 11 Mar, 2026 09:39 AM

नैनीतालः उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए पूर्व के आदेश का अनुपालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की पीठ ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) को...
नैनीतालः उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राज्य परिवहन निगम के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पक्ष में दिए गए पूर्व के आदेश का अनुपालन न करने पर कड़ा रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की पीठ ने परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक (एमडी) को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए आगामी 4 मई की तिथि निर्धारित की गई है।
मामले में सेवानिवृत्त कर्मचारी समेत अन्य ने अवमानना याचिका दायर कर कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया जा रहा है और उनके देयकों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। पूर्व में एकलपीठ ने निगम द्वारा जारी वसूली (रिकवरी) आदेशों पर रोक लगाते हुए निर्देश दिया था कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के सभी बकाया देयकों का भुगतान तीन माह के भीतर किया जाए और जो कटौतियां की गई हैं उन्हें भी ब्याज सहित वापस किया जाए। इस आदेश के खिलाफ निगम ने विशेष अपील दायर की थी लेकिन हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकलपीठ के आदेश को सही ठहराते हुए निगम की अपील को खारिज कर दिया था।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे निगम से विभिन्न पदों से कई वर्ष पहले सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लेकिन, उन्हें अब तक उनके सेवानिवृत्ति लाभ नहीं मिले हैं। उल्टा निगम द्वारा उनके खिलाफ रिकवरी के आदेश जारी कर दिए गए। कर्मचारियों ने कई बार भुगतान के लिए निगम को प्रत्यावेदन भी दिए लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका में यह भी कहा गया कि सेवानिवृत्ति के बाद लंबे समय से बकाया भुगतान न मिलने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। कर्मचारियों ने अदालत से मांग की कि उनके सेवानिवृत्ति लाभों का शीघ्र भुगतान कराया जाए और रिकवरी आदेश पर रोक लगाई जाए।