Edited By Vandana Khosla, Updated: 10 Jan, 2026 04:44 PM

उत्तराखंड/नई दिल्लीः कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच छह माह में पूरी करने और अपराधियों को न्याय प्रक्रिया से दूर रखने की मांग करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर सबूतों को नष्ट करने...
उत्तराखंड/नई दिल्लीः कांग्रेस ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच छह माह में पूरी करने और अपराधियों को न्याय प्रक्रिया से दूर रखने की मांग करते हुए कहा है कि जिन लोगों ने रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाकर सबूतों को नष्ट करने का काम किया है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा तथा पार्टी के संचार विभाग में सचिव वैभव वालिया ने शनिवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुरु से ही इस मामले में लीपापोती करने का प्रयास किया है। सीएम धामी ने जनता के दबाव में विशेष जांच दल-एसआईटी गठित किया। लेकिन, इस जांच में जिन वीआईपी के नाम लिए गए। उनसे पूछताछ तक नहीं की गई। उनका कहना था कि जिस रिजॉर्ट में यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई। वह भाजपा के मंत्री का था और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जबकि उन्हें इस पर माफी मांगनी चाहिए थी।
हत्याकांड की घटना का विवरण देते हुए उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी, भाजपा नेता विनोद आर्या के रिजॉर्ट में नौकरी करती थी। उसकी नौकरी को महीना भी नहीं हुआ था कि उस पर गत वर्ष 18 सितंबर को वीआईपी मेहमानों को अनैतिक सेवाएं देने का दबाव बनाया गया। लेकिन, अंकिता ने मना कर दिया। इसके बाद अंकिता की हत्या कर उसका शव नहर में फेंक दिया गया।
इस मामले में तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा हुई। लेकिन, अंकिता पर दबाव बनाने वाला वीआईपी कौन था, इसका अब तक पता नहीं चला। लांबा ने पीएम मोदी से सवाल किया कि यदि वह एक दिन में ही नोटबंदी की घोषणा कर सकते हैं तो 3 साल से अंकिता को न्याय दिलाने में दिक्कत क्यों हो रही है। जबकि अंकिता के पिता भाजपा नेता अजय कुमार और दुष्यंत कुमार का लगातार नाम ले रहे हैं। लेकिन, एसआईटी ने उनसे पूछताछ तक नहीं की। उन्होंने रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाने पर भी सवाल उठाए और कहा कि बिना न्यायिक आदेश के स्थानीय भाजपा विधायक ने रिजॉर्ट पर बुलडोजर क्यों चलवाया।
एसआईटी की जांच में वीआईपी का नाम क्यों नहीं आया और यदि आरोप गलत था तो इसका खंडन क्यों नहीं किया गया। उनका कहना था कि इस मामले में भाजपा नेताओं का नाम आने पर सिर्फ निष्कासन ही पर्याप्त नहीं था और यदि मंत्री के बेटे का नाम आया था तो पीएम मोदी माफी मांगनी चाहिए थी।
उन्होंने इस मामले में वीआईपी एंगल की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि सबूत नष्ट करने और बुलडोजर चलाने का आदेश देने वालों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। इसके साथ ही महिला कार्य स्थलों पर सुरक्षा कानूनों का सख्ती से अनुपालन होना चाहिए और राजनीतिक संरक्षण देने वालों की जवाबदेही तय कर भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्वतंत्र जांच तंत्र बनाया जाना चाहिए।
कहा कि इस मामले में सीबीआई निष्पक्षता के साथ बिना दबाव के 6 महीने में केस को अंजाम तक ले जाए और भाजपा के लोग नैतिकता दिखाएं और मामले से जुड़े अपराधियों को न्याय प्रक्रिया से दूर रखें, ताकि निष्पक्षता के साथ कार्रवाई हो सके और अंकिता भंडारी को न्याय मिल सके।