उत्तराखंड साइबर पुलिस ने तोड़ा इंटरनेशनल फ्रॉड रैकेट, भारत में बैठे 2 बड़े एजेंट गिरफ्तार

Edited By Ramanjot, Updated: 13 Feb, 2026 07:04 PM

uttarakhand cyber police action

ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर बड़ा एक्शन हुआ है। Uttarakhand Police की साइबर टीम ने पहली बार उस कथित मास्टरमाइंड तक डिजिटल पहुंच बनाई,

देहरादून: ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले एक बड़े अंतरराष्ट्रीय गिरोह पर बड़ा एक्शन हुआ है। Uttarakhand Police की साइबर टीम ने पहली बार उस कथित मास्टरमाइंड तक डिजिटल पहुंच बनाई, जो चीन में बैठकर भारत में साइबर फ्रॉड का नेटवर्क ऑपरेट कर रहा था।

इस हाई-टेक ऑपरेशन में भारत में सक्रिय दो प्रमुख एजेंटों को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह गिरोह लंबे समय से विदेशी सर्वर और हांगकांग आधारित IP एड्रेस का इस्तेमाल कर अपनी असली पहचान छिपा रहा था।

ऐसे खुली ठगी के जाल की परतें

पुलिस ने पारंपरिक जांच के बजाय अंडरकवर रणनीति अपनाई। साइबर टीम के सदस्य खुद निवेशक बनकर व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हुए। धीरे-धीरे बातचीत, ट्रांजैक्शन पैटर्न और डिजिटल गतिविधियों को ट्रैक कर पूरे नेटवर्क की संरचना समझी गई।

गिरोह का तरीका बेहद सुनियोजित था,व्हाट्सएप ग्रुप में विदेशी संचालक, भारतीय एजेंट और संभावित निवेशक जोड़े जाते थे। कुछ “प्रेरक सदस्य” लगातार मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट शेयर कर भरोसा बनाते थे।

शुरुआत में छोटे रिटर्न दिखाकर विश्वास जीता जाता।बाद में “लिमिटेड ऑफर”, “VIP स्लॉट”, “आज आखिरी मौका” जैसे मैसेज से दबाव बनाया जाता।स्थानीय एजेंट खुद को बड़ी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर मोटी रकम निवेश करवाते।

देशभर में फैला था नेटवर्क

जांच के दौरान चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और IP लॉग्स की गहन पड़ताल की गई। कई दिनों की डिजिटल ट्रैकिंग के बाद दो मुख्य भारतीय एजेंटों की पहचान कर उन्हें हिरासत में लिया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि यह गिरोह सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे देश में लोगों को निशाना बना रहा था।

पैसा कैसे किया जाता था गायब?

गिरोह की मनी ट्रेल भी काफी जटिल थी,निवेश की रकम सीधे मुख्य खाते में नहीं जाती थी। पहले इसे “म्यूल अकाउंट्स” यानी फर्जी या किराए के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों, डिजिटल वॉलेट और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए कई लेयर में घुमाया जाता। इस मल्टी-लेयर चेन से ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी। जांच एजेंसियों के लिए इस फाइनेंशियल चेन को तोड़ना सबसे बड़ी चुनौती थी।

साइबर अपराध के खिलाफ बड़ा संदेश

Uttarakhand Police की यह कार्रवाई दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह भी अब कानून की पकड़ से बाहर नहीं हैं। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि अनजान निवेश ऑफर या लिंक पर भरोसा न करें। सोशल मीडिया या व्हाट्सएप ग्रुप में दिखाई गई “गारंटीड रिटर्न” स्कीम से बचें। ठगी की आशंका होने पर तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें।

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