उत्तराखंड: धामी सरकार की बड़ी उपलब्धि, सौर ऊर्जा क्षमता 1000 मेगावाट के पार

Edited By Ramanjot, Updated: 18 Feb, 2026 09:07 PM

uttarakhand solar capacity 2026

उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। राज्य की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता अब 1 गीगावाट से अधिक हो चुकी है

देहरादून: उत्तराखंड ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि दर्ज की है। राज्य की कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता अब 1 गीगावाट से अधिक हो चुकी है और यह आंकड़ा लगभग 1,027.87 मेगावाट तक पहुंच गया है।

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री Narendra Modi की हरित ऊर्जा नीति और आत्मनिर्भर भारत के विजन से प्रेरित बताया। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य की योजनाओं के तालमेल से सौर ऊर्जा को व्यापक जनभागीदारी का रूप मिला है, जिससे रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी बढ़े हैं।

कैसे बढ़ी सौर क्षमता?

राज्य में विभिन्न योजनाओं और मॉडल्स के माध्यम से सौर उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है:

  • ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट: 397 मेगावाट
  • रूफटॉप सोलर (PM Surya Ghar Yojana): 241 मेगावाट
  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना: 137 मेगावाट
  • कॉमर्शियल नेट मीटरिंग: 110 मेगावाट
  • कैप्टिव सोलर पावर प्लांट: 51 मेगावाट
  • कैनाल टॉप और कैनाल बैंक प्रोजेक्ट: 37 मेगावाट
  • सरकारी भवनों पर सोलर इंस्टॉलेशन: 26 मेगावाट

इसके अलावा, कई नई परियोजनाएं भी प्रगति पर हैं, जिनसे आने वाले समय में क्षमता और बढ़ने की उम्मीद है।

रोजगार और पर्यावरण पर असर

सरकार का दावा है कि इन पहलों से स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ा है, कार्बन उत्सर्जन में कमी आई है और राज्य की ऊर्जा आत्मनिर्भरता मजबूत हुई है। स्थानीय युवाओं और छोटे उद्यमियों को सौर परियोजनाओं के जरिए स्वरोजगार के अवसर भी मिले हैं।

UREDA की भूमिका

इस उपलब्धि में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एजेंसी ने परियोजनाओं के क्रियान्वयन, तकनीकी सहयोग, जन-जागरूकता और दूरस्थ क्षेत्रों तक सौर समाधान पहुंचाने में सक्रिय योगदान दिया है।

राज्य सरकार ने अनुकूल नीतियों, सब्सिडी, सरल अनुमति प्रक्रिया और निजी निवेश को बढ़ावा देकर सौर ऊर्जा को गति दी है। भविष्य में क्षमता विस्तार, पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंच और नागरिक भागीदारी को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। यह उपलब्धि उत्तराखंड के लिए न केवल ऊर्जा क्षेत्र में, बल्कि सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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