Edited By Pooja Gill, Updated: 13 Apr, 2026 09:15 AM

Kedarnath Yatra: इस साल बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक पहुंचने में यात्रियों को लगभग 3 घंटे ज्यादा लग सकते...
Kedarnath Yatra: इस साल बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है। रुद्रप्रयाग से केदारनाथ तक पहुंचने में यात्रियों को लगभग 3 घंटे ज्यादा लग सकते हैं। जहां सामान्य दिनों में यह सफर 3–4 घंटे में पूरा हो जाता था, वहीं अब इसमें 6–7 घंटे तक लग सकते हैं। सबसे बड़ी परेशानी रास्ते में बर्फ के बीच ट्रेकिंग को लेकर होगी।
कई चुनौतियों का करना पड़ेगा सामना
रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक सड़क ठीक है, लेकिन इसके बाद दिक्कतें शुरू हो जाती हैं। गुप्तकाशी से गौरीकुंड तक 32 किलोमीटर का रास्ता खराब सड़कों और भूस्खलन वाले क्षेत्रों से गुजरता है, जिससे यह हिस्सा 2–3 घंटे तक ले सकता है। गुप्तकाशी से ही जाम की समस्या भी शुरू हो जाती है। नारायणकोटी और भट्टे तक सड़क ठीक है, लेकिन सिंगल लेन होने के कारण गाड़ियां धीरे चलती हैं। खुमेरा में सड़क दलदली है, जबकि फाटा के पास संकरी सड़क जाम का कारण बनती है। तरसाली में सड़क खराब है और रामपुर में निर्माण कार्य चल रहा है। बड़ासू क्षेत्र में ढीली चट्टानों से खतरा बना रहता है।
बर्फ के बीच से गुजरना पड़ेगा
सोनप्रयाग में सबसे ज्यादा ट्रैफिक रहता है और यहां जाम लगने की संभावना अधिक है। इसके आगे मुनकटिया क्षेत्र में भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। गौरीकुंड से 16 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू होती है। लिंचोली तक रास्ता ठीक है, लेकिन आगे कई जगहों पर 10 से 20 फीट तक बर्फ के बीच से गुजरना पड़ सकता है।
पहली बार बद्रीनाथ रूट पर जाम में भी जारी रहेगी यात्रा
इस बार बद्रीनाथ मार्ग पर पहली बार बाईपास सिस्टम लागू किया जा रहा है, जिससे जाम लगने पर भी यात्रा पूरी तरह नहीं रुकेगी। रुद्रप्रयाग से आगे कुछ जगहों पर भूस्खलन का खतरा है, जैसे गौचर और नंदप्रयाग के पास। जरूरत पड़ने पर वाहनों को बाईपास मार्ग से निकाला जाएगा। चमोली से जोशीमठ तक कुछ संवेदनशील क्षेत्र हैं, लेकिन इसके बाद बद्रीनाथ तक सड़क बेहतर है और यात्रा आसान रहती है। कुल मिलाकर, इस साल केदारनाथ यात्रा कठिन हो सकती है, जबकि बद्रीनाथ यात्रा अपेक्षाकृत सुगम रहने की उम्मीद है।