Edited By Pooja Gill, Updated: 11 Apr, 2026 09:34 AM

देहरादून: उत्तराखंड में शुक्रवार को 'जनगणना 2027' के प्रथम चरण की औपचारिक शुरूआत हो गयी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी...
देहरादून: उत्तराखंड में शुक्रवार को 'जनगणना 2027' के प्रथम चरण की औपचारिक शुरूआत हो गयी और राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत) गुरमीत सिंह तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डिजिटल माध्यम से 'स्व-गणना' की सुविधा से अपनी जानकारी दर्ज की। कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 'मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य प्रारंभ हो गया। डिजिटल इंडिया के अंतर्गत पहली बार नागरिकों को यह सुविधा प्रदान की गई है कि वे जनगणना अधिकारी के घर आने से पूर्व स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकते हैं।
कब तब उपलब्ध रहेगी सुविधा?
अधिकारियों ने बताया कि स्व-गणना की यह सुविधा 10 अप्रैल से 24 अप्रैल तक उपलब्ध रहेगी और इसके पश्चात 25 अप्रैल से 24 मई तक गणना कर्मी घर-घर जाकर आंकड़े इकटठा करेंगे। इस मौके पर राज्यपाल ने कहा कि जनगणना केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य के विकास की आधारशिला है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे स्व-गणना के माध्यम से इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय सहभागिता करें, जिससे आंकड़ों की सटीकता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके।
सीएम ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना से प्राप्त सटीक आंकड़े राज्य सरकार को बेहतर नीतियां बनाने और अंतिम छोर तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहायक होंगे । उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान किया कि वे जनगणना शुभंकर 'प्रगति' और 'विकास' के साथ जुड़कर इस अभियान को सफल बनाएं। प्रदेश के जनगणना मंत्री मदन कौशिक ने भी 'स्व-गणना' से अपनी जानकारियां दर्ज कीं। उन्होंने राज्य की जनता से इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने की अपील भी की। प्रथम चरण में नागरिकों को मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं, जैसे बिजली, पानी, शौचालय आदि तथा संपत्तियों से संबंधित 33 प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। स्व-गणना करने वाले नागरिकों को एक विशेष एसई आईडी प्राप्त होगी, जिसे गणनाकर्मी के आगमन पर उसके साथ साझा करना अनिवार्य होगा। इस कार्य के लिए प्रदेश भर में लगभग 30,000 प्रगणक एवं पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं ।