जाने-माने IFS अधिकारी को लोकपाल में मिली बड़ी जिम्मेदारी, सरकार ने दी मंजूरी

Edited By Ramanjot, Updated: 19 Jun, 2026 03:59 PM

ifs officer sanjeev chaturvedi gets big responsibility in lokpal of india

प्रदेश के अपर सचिव हिमांशु खुराना ने इस संबंध में 13 जून को भारत के लोकपाल के अवर सचिव (स्थापना) को पत्र लिखकर जानकारी दी। इससे पहले लोकपाल कार्यालय ने एक पत्र के जरिए राज्य सरकार से चतुर्वेदी के आवेदन पर सहमति मांगी थी।

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने 'व्हिसलब्लोअर' यानी भ्रष्टाचार को उजागर करने के लिए पहचान रखने वाले भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की भारत के लोकपाल में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार-रोधी संस्था में संयुक्त सचिव स्तर के पद पर उनकी नियुक्ति के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और सतर्कता (विजिलेंस) मंजूरी जारी कर दी है। 

प्रदेश के अपर सचिव हिमांशु खुराना ने इस संबंध में 13 जून को भारत के लोकपाल के अवर सचिव (स्थापना) को पत्र लिखकर जानकारी दी। इससे पहले लोकपाल कार्यालय ने एक पत्र के जरिए राज्य सरकार से चतुर्वेदी के आवेदन पर सहमति मांगी थी। चतुर्वेदी ने सबसे पहले हरियाणा में अपने कार्यकाल के दौरान पेड़ों की अवैध कटाई, अवैध रेत खनन और वन्यजीवों के शिकार के मामलों को उजागर कर राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था। इसके बाद उन्होंने 2012 से अगस्त 2014 के बीच दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में मुख्य सतर्कता अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए कथित भ्रष्टाचार के करीब 200 मामलों का खुलासा किया। 

2015 में 'रमन मैग्सेसे पुरस्कार' से हुए सम्मानित
इसके बाद, अगस्त 2016 में उनका तबादला उत्तराखंड कर दिया गया। वर्ष 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी चतुर्वेदी वर्तमान में हल्द्वानी स्थित उत्तराखंड वानिकी प्रशिक्षण अकादमी के निदेशक तथा मुख्य वन संरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। चतुर्वेदी को मूलरूप से हरियाणा कैडर आवंटित किया गया था, लेकिन बाद में उन्हें उत्तराखंड स्थानांतरित कर दिया गया। सार्वजनिक पदों पर भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने में दिखाई गई असाधारण ईमानदारी और साहस के लिए उन्हें 2015 में 'रमन मैग्सेसे पुरस्कार' से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2019 में लोकपाल में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया था। 

मंत्रालय के स्तर पर लंबित रहा यह मामला
उत्तराखंड सरकार ने 23 दिसंबर 2019 को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को अनापत्ति प्रमाणपत्र और सिफारिश के साथ उनका आवेदन भेज दिया था, लेकिन इसके बाद यह मामला मंत्रालय के स्तर पर लंबित रहा। नियुक्ति में देरी को लेकर चतुर्वेदी ने फरवरी 2020 में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) में याचिका दायर कर मंत्रालय को निर्णय लेने का निर्देश देने का अनुरोध किया था। सितंबर 2022 में न्यायाधिकरण ने मंत्रालय को निर्देश दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर मामले पर फैसला करे या यदि नियुक्ति का अधिकार लोकपाल के पास होने का मत हो तो मामला लोकपाल को भेज दे। 

हालांकि, इसके बजाय तीन अक्टूबर 2022 को मामला वापस चतुर्वेदी को लौटा दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने दिसंबर 2022 में अवमानना याचिका दायर की। बाद में न्यायाधिकरण की नैनीताल पीठ ने फरवरी 2023 में संबंधित सचिव को पूर्व आदेश की अवहेलना के आरोप में अवमानना नोटिस जारी किया। हरियाणा में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व वन मंत्री किरण चौधरी के कार्यकाल में हुए कथित वानिकी घोटाले में 'व्हिसलब्लोअर' रहे चतुर्वेदी का राज्य में कार्यकाल भी विवादों और लगातार तबादलों से जुड़ा रहा। हरियाणा में सेवा के दौरान पांच वर्षों में उनका 12 बार तबादला किया गया था। 

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!