Uttarakhand News: गांव खाली करो! ऐसे कैसे रुकेगा पलायन, कई परिवार हो जाएंगे बेघर

Edited By Nitika, Updated: 25 Jan, 2024 12:17 PM

government order to vacate the village

सरकार कहती है रिवर्स पलायन करो... सरकार कहती है, स्वरोजगार करो...सरकार कहती है, पलायन न करो, लेकिन जब किसी के पास जमीन ही नहीं बचेगी तो, वो कैसे स्वरोजगार करेगा? क्यों रिवर्स पलायन करेगा?

देहरादूनः सरकार कहती है रिवर्स पलायन करो... सरकार कहती है, स्वरोजगार करो...सरकार कहती है, पलायन न करो, लेकिन जब किसी के पास जमीन ही नहीं बचेगी तो, वो कैसे स्वरोजगार करेगा? क्यों रिवर्स पलायन करेगा?

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इस लेटर को ध्यान से देखिए..कहने को तो ये सिर्फ एक कागज हैं लेकिन इस कागज से सैकड़ों लोग बेघर हो जाएंगे। उनके पास न तो जमीन बचेगी न घर। जब जमीन और घर ही नहीं बचेगा वो स्वरोजगार कैसे करेगा? और रिवर्स पलायन क्यों करेगा? इस लाइन पर नजर डालिए...साफ लिखा गया है कि तहसील नरेंद्र नगर के ग्राम कुई की 2.166 हेक्टेयर भूमि को जिला स्तरीय विकास प्राधिकरण को हस्तांतरण किया जाएगा। अब सवाल ये हैं कि जब गांव के इतनी जमीन को जिला प्रशासन यहां के निवासियों से छीन लेगी तो, यहां के निवासी कहा जाएंगे? और फिर कैसे स्वरोजगार करेंगे?

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आपको बता दें कि कुई गांव पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण हैं, ये गांव ऋषिकेश से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर हैं। कुई गांव उत्तराखंड के उन गांवों में से एक हैं, जहां पलायन न के बराबर हुआ है, चुनिंदा लोगों को छोड़ दे तो यहां हर एक आदमी स्वरोजगार से जुड़ा हैं। ऐसे में सरकार और जिला प्रशासन का इन लोगों से जमीन वापस लेना कितना उचित है? एक तरफ सरकार रोजगार के साधन बढ़ाने के लिए गांवों में बाहरी लोगों पट्टे अलॉट कर रही हैं, और जमीनों को लीज पर दे रही हैं। ऐसे में जिस जमीन एक दो नहीं बल्कि छ: पीढ़ियों से ये लोग रह रहे है, उनको इस जमीन से हटाना कितना उचित हैं, आप ही बताएं?

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दरअसल, जिन जमीन जिक्र हम कर रहे हैं वो राजस्व और ग्राम समाज की हैं, जिस पर कई पीढ़ियों से यहां के लोग आश्रित हैं, इसी जमीन से यहां के लोग चारा पत्ती और कृषि करते, साथ ही कई युवा स्वरोजगार भी कर रहे हैं। जिला प्रशासन अपने आदेश में इस भूमि को बंजर बताया है, जबकि यहां के लोग इस जमीन पर कई पीढ़ियों से खेती करते आ रहे हैं, साथ दुकान खोल कर स्वरोजगार कर अपने परिवार का गुजारा चला रहें हैं। जब इस जमीन पर पीढ़ी दर पीढ़ी और सालों ग्रामीण खेती कर रहे हैं, और निवास कर रहे हैं, तो ऐसे अब उनकी जमीनें उन से छिनना सबकी समझ से परे है। इस मामले को लेकर जब हमारी टीम यहां के स्थानीय विधायक और उत्तराखंड सरकार के वन मंत्री सुबोध उनियाल के पास पहुंची तो उन्होंने भी इस फैसले को गलत बताया।

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फिलहाल मंत्री जी ने जिला प्रशासन को इस फैसले पर रोक लगाने के आदेश दे दिए है। एक तरफ सरकार पलायन रोकने के लिए कई योजना चला रही हैं, ऐसे में जिस गांव से न के बराबर पलायन हुआ , जहां का हर एक आदमी स्वरोजगार से जुड़ा हो, उन से उनकी जमीन छिनना बिल्कुल भी उचित नहीं हैं। एक तरफ पुराने काबिज लोगों को नियमित करने के लिए सरकार ने कमेटी बनाई हैं और दूसरी तरफ जिला प्रशासन ग्रामीणों से उनकी जमीनों को छीन रहा हैं। अगर जिला प्रशासन अपने इस फैसले को वापस नहीं लेता है तो, फिर यहां के लोग कहां जाएंगे? कैसे अपने परिवार को गुजारा चलाएंगे? स्वरोजगार कैसे करेगा? पलायन कैसे रुकेगा? उत्तराखंड की धामी सरकारी को इस ओर ध्यान देना चाहिए और इस गांव के ग्रामीणों को पलायन के लिए मजबूर होने से बचाना चाहिए।

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