Edited By Vandana Khosla, Updated: 18 Mar, 2026 02:08 PM

देहरादूनः उत्तराखंड के देहरादून में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राजधानी में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.5 रही। वहीं, शहर के ट्रांजिट कैंप में आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची दमकल की टीम ने आग पर काबू पाया...
देहरादूनः उत्तराखंड के देहरादून में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। राजधानी में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.5 रही। वहीं, शहर के ट्रांजिट कैंप में आग लगने की सूचना मिली। मौके पर पहुंची दमकल की टीम ने आग पर काबू पाया गया। भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़ जैसी आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया।
गौरतलब हो कि मंगलवार को बागेश्वर, पौड़ी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग एवं नैनीताल जिलों में व्यापक स्तर पर बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित किए गए। इन मॉक ड्रिल के जरिये संभावित आपदा की परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया, विभागीय समन्वय, संसाधनों की उपलब्धता तथा राहत एवं बचाव तंत्र की वास्तविक तैयारियों का आकलन किया गया। यह पहला अवसर है जब जिलों द्वारा स्वयं अपने स्तर पर मॉक ड्रिल की गई और यूएसडीएमए द्वारा सिर्फ मॉनीटरिंग की गई।
राज्य के आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सचिव विनोद कुमार सुमन ने आज जानकारी देते हुए बताया कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी जिलों में संचालित मॉक अभ्यासों की निरंतर निगरानी की गई। विभिन्न परिद्दश्यों जैसे भूकम्प, भूस्खलन, सड़क दुर्घटना, नदी में बाढ़, वनाग्नि एवं अन्य आपात स्थितियों के माध्यम से तैयारियों को परखा गया। उन्होंने बताया कि मॉक अभ्यास के दौरान पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), अग्निशमन सेवा विभाग , स्वास्थ्य विभाग, विद्युत विभाग, राजस्व विभाग सहित अन्य आपातकालीन सेवाओं ने समन्वित रूप से कार्य करते हुए प्रभावितों के सुरक्षित रेस्क्यू, प्राथमिक उपचार, राहत वितरण की प्रक्रियाओं का अभ्यास किया।
सुमन ने कहा कि इस प्रकार के राज्य स्तरीय मॉक अभ्यास न केवल हमारी तैयारियों की वास्तविक स्थिति को सामने लाते हैं, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को और अधिक सुद्दढ़ करते हैं। उन्होंने बताया कि आपदा की स्थिति में गोल्डन ऑवर के दौरान त्वरित एवं संगठित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है और ऐसे अभ्यास उसी दिशा में हमारी क्षमता को निरंतर बेहतर बनाते हैं। साथ ही, इनसे प्राप्त अनुभवों के आधार पर कमियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दूर किया जा सकता है, जिससे जन-धन की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
उन्होंने बताया कि इस राज्यव्यापी मॉक ड्रिल का उद्देश्य आपदाओं के दौरान प्रशासनिक तत्परता का परीक्षण, विभिन्न विभागों के मध्य आपसी समन्वय को मजबूत करना, संचार एवं समन्वय तंत्र की खामियों की पहचान कर उन्हें दूर करना तथा फील्ड स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का आकलन करना है, ताकि वास्तविक आपदा की स्थिति में किसी प्रकार की देरी या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।
इस अवसर पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन महावीर सिंह चौहान, वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार तथा यूएसडीएमए के विशेषज्ञ मौजूद रहे।