Uttarakhand News... चार धाम यात्री अब ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल पर बना सकते हैं ‘आभा' खाता

Edited By Khushi, Updated: 12 Jul, 2024 02:09 PM

char dham pilgrims can now create abha account on e swasthya dham portal

केंद्र सरकार ने बीते गुरुवार को कहा कि उत्तराखंड सरकार का ‘ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल' अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के साथ जुड़ गया है, जिससे चार धाम यात्री सुगमता से अपने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य खाते बना सकते हैं।

नई दिल्ली/देहरादून: केंद्र सरकार ने बीते गुरुवार को कहा कि उत्तराखंड सरकार का ‘ई-स्वास्थ्य धाम पोर्टल' अब आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के साथ जुड़ गया है, जिससे चार धाम यात्री सुगमता से अपने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य खाते बना सकते हैं। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार एबीडीएम के एक हिस्से के रूप में आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता (आभा) का निर्माण तीर्थयात्रियों के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद पहचान स्थापित करेगा जो उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटल रूप से प्रबंधन करने में मदद करेगा।

बता दें कि एबीडीएम की शुरुआत सितंबर 2021 में की गई थी। इसका उद्देश्य देश में एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचा तैयार करना है। उत्तराखंड सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘ई-स्वास्थ्य धाम' नाम के पोर्टल की शुरूआत की है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार ‘ई-स्वास्थ्य धाम' एक ऐसा पोर्टल है जो चार धाम यात्रा तीर्थयात्रियों के स्वास्थ्य मानकों की निगरानी में मदद करता है और नतीजतन, यह यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने वाले तीर्थयात्रियों की यात्रा सुगम बनाता है। बयान के अनुसार ‘ई-स्वास्थ्य धाम' पोर्टल तीर्थयात्रियों को कई तरह के लाभ प्रदान करता है और उनमें से एक है आभा कार्ड (आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता) बनाना।

तीर्थयात्री आसानी से ‘ई-स्वास्थ्य धाम' पोर्टल पर सिर्फ दो मिनट में 14-अंकों का आभा नंबर बना सकते हैं। मंत्रालय ने कहा कि तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए, यह पोर्टल सुनिश्चित करता है कि सुरक्षित और सुगम यात्रा के लिए उनके, खासकर वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। चार धाम अधिक ऊंचाई पर स्थित हैं, इसलिए ठंड के मौसम और कम ऑक्सीजन के स्तर के कारण हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और श्वसन रोग, मधुमेह आदि जैसे स्वास्थ्य संबंधी रोगों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होता है। बयान के अनुसार देश में अब तक 65 करोड़ से ज्यादा आभा कार्ड बन चुके हैं।

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